अररिया शहर के बस स्टैंड पर बुनियादी सुविधाएं बिल्कुल नदारद.. The Samwaad । Araria
कहने को तो अररिया को शहर का दर्जा मिल गया है। जिला घोषित होने से लगभग 3 दशक से ज्यादा हो गया है लेकिन आज भी यहां बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है।शहर के बस स्टैंड पर कोई भी बुनियादी सुविधाएं नहीं है। आज भी बस स्टैंड एनएच 57 के किनारे पर ही लगता है जबकि इस बस स्टैंड से लोकल वाहन ही नहीं बल्कि दूर प्रांतों की भी बड़ी गाड़ियां यहां से रोजाना आती जाती है।इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां से जाने वाले यात्रियों की संख्या कितनी हो सकती है।
लेकिन शहर के एकमात्र बस स्टैंड की सड़क पर लगने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।इस बस स्टैंड से बिहार के दूसरे जिलों के साथ बिहार की राजधानी पटना की बसें रोजाना खुलती है। और कभी-कभी उत्तर प्रदेश, गोरखपुर, मेरठ के साथ पंजाब, हरियाणा, दिल्ली की बसें भी खुलती है। लेकिन उन यात्रियों के लिए यहां बैठने तक की भी सुविधा उपलब्ध नहीं है।
अररिया को जिले का दर्जा लगभग तीन दशक पहले ही मिल चुका था। तब से ही यह जिला कई बुनियादी असुविधाओं से जूझ रहा है। शहर के नजदीक जीरोमाइल में एक बस स्टैंड पहले से मौजूद है। जिस पर नगर परिषद का कोई नियंत्रण नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र में होने के कारण इस पर जिला परिषद का मालिकाना हक है। लेकिन शहर का बस स्टैंड जो रानीगंज और फारबिसगंज की ओर जाने के लिए है, उनमें इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी वहां सुविधाएं नहीं है और ना ही नगर परिषद नया बस स्टैंड बना रहा है।
बस स्टैंड पर कुछ यात्रियों ने बताया कि शहर का सबसे गंदा और सुविधाओं से भरी जगह यह अररिया बस स्टैंड है। यहां बारिश के दिनों में सड़क पर एक से डेढ़ फिर पानी जमा हो जाता है, जिससे खड़ी बसों में यात्रियों को चढ़ने उतरने में काफी दिक्कतें आती है।
जल निकासी का कोई भी बंदोबस्त नहीं किया गया है। स्टैंड पर बस की बुकिंग करने वालों ने बताया कि इस बस स्टैंड में आने वाली बसों से नगर परिषद 50 और ऑटो से ₹10 हर ट्रिप पर लेता है, नगर परिषद को अच्छी-खासी आमदनी हो रही है। लेकिन नगर परिषद ने बस स्टैंड पर न तो शौचालय की व्यवस्था की है, न ही पीने के पानी की। यहां यात्रियों के बैठने की जगह नहीं होने के कारण वे सड़क पर यूं ही खड़े रहते हैं, जब तक उन्हें सवारी न मिल जाए। उन्होंने बताया कि इसकी शिकायत कई बार नगर परिषद से की गई कि कम से कम यहां एक शौचालय और बैठने की व्यवस्था यात्रियों के लिए कर दी जाए, लेकिन आज तक इस दिशा में काम नहीं हुआ।
1984 से बस की बुकिंग कर रहे बीरेंद्र कुमार उर्फ बुलबुल ने बताया कि यहां से कोरोना काल में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान के लिए बसें खुलती थी लेकिन कई बसों को फाइन लगने के बाद अब यहां से वे गाड़ियां नहीं चलती है। लेकिन राजधानी पटना के साथ बिहार के अन्य जिलों के लिए तकरीबन 20 से 25 लग्जरी बस रोजाना खुलती है।
साथ ही दूसरी ओर यहीं पर एनएच 327ई से होकर सुपौल, सहरसा, त्रिवेणीगंज जैसी जगहों के लिए दर्जनों गाड़ियां चलती है।साथ ही ज़िले के भीतर फारबिसगंज, जोगबनी, नरपतगंज, बथनाहा, बीरपुर, सिकटी, कुर्साकांटा के लिए भी बड़ी बसें यहां से दिन में कई फेरे लगाती है। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां से सफर करने वाले यात्रियों की संख्या कितनी अधिक है, मगर सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं मिल रहा। बस से परिवार को ले जा रहे व्यक्ति ने बताया कि हम बाहर से अररिया में कुछ काम से आए थे, हमारे साथ महिला और बच्चे शामिल हैं। उनके लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं होने के कारण हमें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
उन्होंने बताया कि नगर परिषद को एक शौचालय की व्यवस्था कर देनी चाहिए। उनके साथ ही कई और यात्रियों ने बताया कि शौचालय नहीं होने के कारण यहां वहां लोगों को पेशाब करना पड़ रहा है, जिससे गंदगी भी बढ़ती है और यहां खड़े रहने में यात्रियों को परेशानी होती है।
नगर परिषद के चेयरमैन रितेश राय ने कुछ दिनों पहले एक मीडिया पोर्टल से बात करते हुए बताया कि साल 2017 में मुझे यह पद मिला है। तभी से बस स्टैंड बनाने को लेकर हम लोगों ने कई बार प्लान तैयार किया।तत्कालीन डीएम हिमांशु शर्मा ने भी पहल की और सिंचाई विभाग से अनुरोध किया कि गोढ़ी चौक से होकर अररिया बस स्टैंड तक नहर के किनारे अपनी जमीन पर बस स्टैंड बनाने दिया जाए। इस प्लान को विभाग तक भेज भी दिया गया। जिस पर सिंचाई विभाग ने भी उस वक्त सहमति दी और सरकार को प्रतिवेदन भेजा गया।
उन्होंने बताया कि कई बार नगर विकास की ओर से पटना में बैठक बुलाई गई जिसमें सभी जिले के चेयरमैन और मेयरों के साथ नगर विकास के सचिव व उप मुख्यमंत्री भी शामिल थे। वहां उन्होंने बस स्टैंड के मुद्दे को सदन में रखा था जिस पर सरकार के सचिव ने भी संज्ञान लिया। लेकिन कुछ दिनों बाद इस प्रपोजल को सिंचाई विभाग ने वापस कर दिया और बस स्टैंड बनाने पर असहमति जाहिर की। बताया जाता है कि इस को लेकर मुख्यमंत्री ने भी सिंचाई विभाग के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की थी। लेकिन विभागीय अर्चन में यह बस स्टैंड नहीं बन पाया।
चेयरमैन ने बताया, जहां अभी एनएच 57 के किनारे बस स्टैंड है, उसके पीछे भी सिंचाई विभाग की जमीन है। जिस पर हम लोगों ने सिर्फ 1000 स्क्वायर फीट जगह मांगी थी ताकि वहां एक मॉडल डीलक्स शौचालय बनाया जा सके। लेकिन इस निर्माण पर भी सिंचाई विभाग ने असहमति जाहिर की।
उन्होंने बताया कि नगर परिषद के पास अपनी जमीन नहीं होने के कारण इस तरह की स्थिति उत्पन्न हो रही है। शौचालय बनाने के लिए हम लोगों ने सिंचाई विभाग से यह भी कहा था कि जिस जगह पर या मॉडल डीलक्स शौचालय बनेगा उस पर मालिकाना हक आप ही के हाथों में होगा। हम लोग सिर्फ इसकी देखरेख करेंगे। लेकिन फिर भी वह राजी नहीं हुए। जिस कारण आज भी मामला यूं ही अधर में लटका हुआ है। उन्होंने बताया कि नगर परिषद के पास पूरे शहर में कहीं भी अपनी भूमि नहीं है। इस कारण कोई भी निर्माण नहीं करा पा रहे हैं। लेकिन इसमें कोई दूसरा विभाग भी सहयोग नहीं कर रहा है। जिस कारण शहर में सार्वजनिक शौचालय या बस स्टैंड में कोई सुविधा नगर परिषद नहीं दे पा रहा है। फिर भी हम लोग प्रयासरत हैं इसके लिए सरकार से बार-बार पत्राचार किया जा रहा है।
Hammad Haider
The Samwaad/द संवाद
