इफ्तेखार आलम✍️
बिहार विधानसभा चुनाव 2020 दिलचस्प मोड़ की ओर बढ़ रहा है।
जहां राजद गठबंधन में शामिल पार्टीयां समझोते के बाद अपने -अपने कोटे की सीटों पर उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कररही हैं ,वहीं दूसरी तरफ भाजपा के NDA गठबंधन में सीटों के बटवारे पर खिचड़ी तो पक गई है लेकिन मुकेश सहनी की VIP पार्टी इस पकी हुई खिचड़ी में अपना दाल गलाना चाहती है, इसी कारण अभी हांडी को चुलहे से नही उतारा गया है।
रामविलास पासवान/चिराग़ पासवान की लोक जनशक्ती पार्टी लोजपा ने, पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद NDA गठबंधन से अलग हो कर जनता दल यूनाइटेड (जदयू ) कोटे की सभी सीटों सहित कुल 143 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है और एक दिलचस्प नारा भी दिया है ” भाजपा से बैर नही – नीतीश कुमार की खैर नहीं ,,|
लोजपा के बयानों /व्यवहारों पर भाजपा की केन्द्रीय टीम और जदयू खामोश है, चुप्पी साधे हुए है।
लोक जनशक्ति पार्टी के बयानों और व्यवहारों पर कुछ प्रश्नों का उभरना स्वभाविक है
1 – दरअसल भाजपा चाहती क्या है? क्या वो चुनाव के बाद जदयू से अलग हो कर अपनी खुद की मुख्यमंत्री वाली सरकार चाहती है?
2 -क्या भाजपा और लोजपा में अंदरूनी गठबंधन तो नही है?
3 -क्या चिराग़ पासवान को भाजपा केन्द्रीय नेतृत्व की तरफ से यह आश्वासन तो नहीं मिला है, कि हमारे कोर वोटर/केडर, जदयू के कोटे वाली सीटों पर लोजपा को अंदर खाने वोट करेगी?
4 – क्या चुनाव के बाद भाजपा की खुद की सरकार बनाने की लालसा को देख कर नीतीश कुमार तेजस्वी यादव के नेतृत्व में सरकार बनाने की पहल कर देंगे?
5- क्या चुनाव बाद, लालू को जेल से छोड़ने के वादे पर, भाजपा सरकार बनाने के लिये नीतीश को छोड़ तेजस्वी की तरफ़ पहल कर सकती है?
बहुत से ऐसे सवाल हैं जिस का जवाब भविष्य के गर्भ में है लेकिन इतना तो तय है चुनाव से अधिक रोचक घटनाएं चुनाव के बाद सरकार बनाते समय घटेगी।
