द संवाद एवं छाँव फ़ाउंडेशन के संस्थापक सदस्य सिबतेन अहमद को नम आंखों से सभी ने दी अंतिम विदाई।रहने को दहर् में आता नहीं कोई!तुम जैसे गए, वैसे जाता नहीं कोई!!आया है सो जाएगा, राजा रंक फकीर!और वो चला गया; वहीं जहां से कभी कोई लौट कर नहीं आया।बड़ा नेक और बहुत ही प्यारा था वो। कल ही तो दोस्तों के बीच बैठ कर भविष्य की योजनाएं बना रहा था। कितनी समझदारी की बात कर रहा था वो। राजनीति की कितनी समझदारी थी उसमें। चंद मिनटों बाद ही सब कुछ खत्म हो जाएगा, किसे इसका गुमान था? सबको रुला कर चला गया एक दिदावर।जी हम बात कर रहे हैं छांव फाऊंडेशन के निदेशक और “द संवाद” न्यूज पोर्टल के संस्थापक सदस्य जनाब सिब्तैन अहमद की; जिनका कल तीन अक्टूबर की रात बिजली के एक शार्ट सर्किट हादसे में असामयिक मृत्यु हो गई।श्री अहमद एक प्रगतिशील युवा थे। एक प्रतिष्ठित प्राइवेट स्कूल कैरियर गाईड एकेडमी के निदेशक थे। अररिया जिला प्राइवेट स्कूल एशोसिएशन के अध्यक्ष थे। साथ ही अररिया जिला कांग्रेस के वे प्रवक्ता भी थे। कई अन्य संगठनों के साथ जुड़ कर वे सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहते थे। उनके इस असामयिक मौत से आज अररिया शहर पूरी तरह गमगीन रहा। चुंकि जनाब सिब्तैन अहमद की मौत एक दुर्घटना के तहत हुई थी, इस लिए आज सुबह उनका अररिया सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम किया गया और फिर उनके पार्थिव शरीर को रानीगंज प्रखंड स्थित उनके पैतृक गांव हरपुर ले जाया गया, जहां दोपहर बाद दिन के तीन बजे हजारों लोगों की उपस्थिति में उन्हें सुपुर्देखाक कर दिया गया।छांव फाऊंडेशन और द संवाद की ओर से हम अपने संस्थापक सदस्य को श्रद्धांजलि देते हैं, खिराजे अकीदत पेश करते हैं।
